नमस्कार दोस्तों आज के इस आर्टिकल में आपको बताएंगे Rachna Shikshan के बारे में। जैसे कि रचना शिक्षण का अर्थ, रचना शिक्षण के उद्देश्य, रचना शिक्षण की विधियां, रचना शिक्षण का महत्व, तथा रचना शिक्षण संबंधित सुझाव आपको इस आर्टिकल में देंगे। तो इस आर्टिकल को पूरा जरूर पढ़ें। आइए शुरू करते -
रचना शिक्षण का अर्थ (Rachna Shikshan Ka Arth In Hindi 2023)
योगेंद्रजीत ने रचना के संबंध में लिखा है कि 'रचना वह सार्थक एवं कलात्मक अभिव्यक्ति है जिसके द्वारा हम निश्चित उद्देश्य को सामने रखकर अपने विचारों को लिपिबद्ध करते हैं।'
रचना शिक्षण के उद्देश्य (Rachna Shikshan Ke Uddeshya 2023)
रचना शिक्षण के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं -
- छात्रों में विचार शक्ति एवं निरीक्षण शक्ति का विकास करना।
- साहित्य में रुचि रखने वाले एवं प्रभावशाली छात्रों को रचना कला में निपुण करना।
- छात्रों में ऐसी क्षमता उत्पन्न करना कि वे अपने विचारों को क्रमबद्ध एवं श्रेणीबद्ध रूप में प्रस्तुत कर सकें।
- छात्रों में रचनात्मक तथा सृजनात्मक शक्तियों का विकास करना।
- छात्रों में विभिन्न लेखकों की शैलियों का ज्ञान कराना, जिससे वे भी स्वतंत्र शैली का निर्माण कर सकें।
- छात्रों में स्वयं के शब्द भंडार का उचित प्रयोग कर सकने की योग्यता उत्पन्न करना।
रचना शिक्षण की विधियां (प्रणालियां) (Rachna Shikshan ki Vidhiyan 2023)
रचना शिक्षण की विधियां निम्नलिखित हैं -
- खेल प्रणाली
- प्रश्नोत्तर प्रणाली
- उद्बोधन प्रणाली
- रूपरेखा प्रणाली
- प्रवचन या व्याख्यान प्रणाली
- आदर्श प्रणाली
- प्रबोधन प्रणाली
- अनुकरण प्रणाली
- तर्क प्रणाली
- चित्र वर्णन प्रणाली
1. खेल प्रणाली-
2. प्रश्नोत्तर प्रणाली-
3. उद्बोधन प्रणाली-
4. रूपरेखा प्रणाली-
5. प्रवचन या व्याख्यान प्रणाली-
6. आदर्श प्रणाली-
7. प्रबोधन प्रणाली-
8. अनुकरण प्रणाली-
इसमें छात्रों को रचना को ध्यान पूर्वक अध्ययन करने के लिए कहा जाता है जिससे कि वे उसकी भाषा एवं शैली को ठीक प्रकार से समझ सकें।
इसके पश्चात छात्रों को पढ़ी गई रचना से मिलती जुलती एक अन्य संरचना लिखने को दी जाती है। छात्र उस रचना को उसी भाषा एवं शैली में लिखने का अभ्यास करते हैं।
9. तर्क प्रणाली-
10. चित्र वर्णन प्रणाली-
शिक्षक छात्रों से चित्र की ओर संकेत कर के क्रमबद्ध प्रश्न पूछता है। उसके बाद चित्र को उल्टा करके रचना करने को कहा जाता है। चित्र वर्णन प्रणाली छोटे छात्रों के लिए रोचक एवं उत्साहवर्धक है।
रचना शिक्षण का महत्व (Rachna Shikshan Ka Mahatva In Hindi 2023)
- रचना के द्वारा छात्रों में लेखन शक्ति का विकास होता है।
- छात्रों में रचना शिक्षण के द्वारा विवेचनात्मक शक्ति, विचार शक्ति तथा कल्पना शक्ति का विकास होता है।
- रचना के द्वारा छात्रों में भाव अभिव्यक्ति, सृजनात्मक, रचनात्मक, शैलीगत एवं चिंतन आदि प्रवृत्तियों का विकास होता है।
- रचना के द्वारा छात्रों में भाषागत, भाषा विज्ञानगत तथा व्याकरणगत नियमों का पालन स्पष्ट होता है।
रचना शिक्षण संबंधी सुझाव-
- रचना कार्य प्रदान करते समय छात्रों के मानसिक स्तर का ध्यान रखना चाहिए।
- लिखित रचना का संशोधन छात्रों के सामने ही किया जाना चाहिए।
- रचना के समय छात्रों को अभिव्यक्ति का पूर्ण अवसर प्रदान करना चाहिए।
- रचना न अधिक बडी और न अधिक संक्षिप्त होनी चाहिए।
- रचना में किसी भी तरह का विरोधाभास नहीं होना चाहिए।
- लिखित रचना से पहले मौखिक रचना आवश्यक रूप से करा लेनी चाहिए।
- रचना का विषय छोटी कक्षाओं में छात्रों की रुचि के अनुकूल होना चाहिए।
- रचना में अस्पष्ट वाक्यों का प्रयोग नहीं होना चाहिए।
निष्कर्ष:
तो मिलते हैं आपसे अगले आर्टिकल पर तब तक के लिए नमस्कार।
आपके सवाल FAQ-
1. रचना शिक्षण की विधियां कौन-कौन सी है?
- खेल प्रणाली
- प्रश्नोत्तर प्रणाली
- उद्बोधन प्रणाली
- रूपरेखा प्रणाली
- प्रवचन या व्याख्यान प्रणाली
- आदर्श प्रणाली
- प्रबोधन प्रणाली
- अनुकरण प्रणाली
- तर्क प्रणाली
- चित्र वर्णन प्रणाली


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