रचना शिक्षण से आप क्या समझते हैं? | रचना शिक्षण के उद्देश्य, प्रमुख विधियां, और महत्व | Rachna Shikshan in Hindi

AKHILESH KUMAR
0

नमस्कार दोस्तों आज के इस आर्टिकल में आपको बताएंगे Rachna Shikshan के बारे में। जैसे कि रचना शिक्षण का अर्थ, रचना शिक्षण के उद्देश्य, रचना शिक्षण की विधियां, रचना शिक्षण का महत्व, तथा रचना शिक्षण संबंधित सुझाव आपको इस आर्टिकल में देंगे। तो इस आर्टिकल को पूरा जरूर पढ़ें। आइए शुरू करते -

रचना शिक्षण का अर्थ (Rachna Shikshan Ka Arth In Hindi 2023)

रचना शिक्षण से आप क्या समझते हैं? रचना शिक्षण के उद्देश्य, प्रमुख विधियां, और इसका महत्व 2023

जब भाषा तथा भाव को सुंदर ढंग से क्रमबद्ध रूप से संजोया जाता है तो वह रचना कहलाती है। इस तरह, किसी विचार या बात को अच्छी तरह से मनन एवं क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत करना ही रचना है, लेकिन रचना केवल भाषा से संबंधित ना होकर साहित्य एवं कला से संबंधित है।


योगेंद्रजीत ने रचना के संबंध में लिखा है कि 'रचना वह सार्थक एवं कलात्मक अभिव्यक्ति है जिसके द्वारा हम निश्चित उद्देश्य को सामने रखकर अपने विचारों को लिपिबद्ध करते हैं।'


रचना शिक्षण के उद्देश्य (Rachna Shikshan Ke Uddeshya 2023)

रचना शिक्षण के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं -

  • छात्रों में विचार शक्ति एवं निरीक्षण शक्ति का विकास करना।
  • साहित्य में रुचि रखने वाले एवं प्रभावशाली छात्रों को रचना कला में निपुण करना।
  • छात्रों में ऐसी क्षमता उत्पन्न करना कि वे अपने विचारों को क्रमबद्ध एवं श्रेणीबद्ध रूप में प्रस्तुत कर सकें।
  • छात्रों में रचनात्मक तथा सृजनात्मक शक्तियों का विकास करना।
  • छात्रों में विभिन्न लेखकों की शैलियों का ज्ञान कराना, जिससे वे भी स्वतंत्र शैली का निर्माण कर सकें।
  • छात्रों में स्वयं के शब्द भंडार का उचित प्रयोग कर सकने की योग्यता उत्पन्न करना।

रचना शिक्षण की विधियां (प्रणालियां) (Rachna Shikshan ki Vidhiyan 2023)

रचना शिक्षण की विधियां निम्नलिखित हैं -

  1. खेल प्रणाली
  2. प्रश्नोत्तर प्रणाली
  3. उद्बोधन प्रणाली
  4. रूपरेखा प्रणाली
  5. प्रवचन या व्याख्यान प्रणाली
  6. आदर्श प्रणाली
  7. प्रबोधन प्रणाली
  8. अनुकरण प्रणाली
  9. तर्क प्रणाली
  10. चित्र वर्णन प्रणाली

1. खेल प्रणाली-

इस प्रणाली द्वारा छात्र सीखने के साथ ही साथ रुचि एवं आनंद भी प्राप्त करते हैं, इसे खेल प्रणाली कहा जाता है, मनोवैज्ञानिकों के अनुसार छात्र खेलों में विशेष रूप से आनंद लेते हैं। अतः जो शिक्षा खेलों के द्वारा प्रदान की जाती है, वह शिक्षा सबसे अच्छी होती है।

2. प्रश्नोत्तर प्रणाली-

प्रश्नोत्तर प्रणाली के माध्यम से ही विषय पूरी तरह से आत्मसात अर्थात् उसका सार ग्रहण कर लिया जाता है। प्रश्नोत्तर पहले मौखिक कार्य में, इसके बाद में लिखित कार्य में संपादित किया जाता है।

3. उद्बोधन प्रणाली-

इस प्रणाली में आत्मकथा, जीवन चरित्र, ऐतिहासिक, भौगोलिक एवं सांस्कृतिक धार्मिक स्थानों का वर्णन कराया जाता है। इसमें तथ्यों के लिए छात्रों को प्रेरित करके कल्पना एवं विचार शक्ति को उद्बोधित करके रचना के निमित्त एवं सुसुप्त भावनाओं को उत्पन्न किया जाता है।

4. रूपरेखा प्रणाली-

रूपरेखा प्रणाली का प्रयोग प्रत्येक स्तर पर किया जा सकता है। इस प्रणाली में शिक्षक प्रश्न पूछकर छात्रों एवं रचना का विकास करता है तथा उसे सूत्र रूप में श्यामपट्ट (Black Board) पर लिखता है। छात्रों को इन सूत्रों की सहायता से रचना करने के लिए कहा जाता है।

5. प्रवचन या व्याख्यान प्रणाली-

इस प्रणाली में शिक्षक अपने व्याख्यान के द्वारा छात्रों को उद्बोधित करता है। इसके बाद शिक्षक छात्रों को रचना का रूप देने का आदेश देता है। इस तरह इस प्रणाली में सदैव वैज्ञानिक, विवेचनात्मक तथा अज्ञात नियमों को महत्व प्रदान किया जाता है।

6. आदर्श प्रणाली-

इस प्रणाली में छात्रों के सामने मौखिक रूप से निबंध प्रस्तुत किया जाता है। इसके पश्चात छात्र आदर्श रचना के अनुसार रचना करते हैं। आदर्श प्रणाली का उपयोग उच्च कक्षा के लिए किया जाता है।

7. प्रबोधन प्रणाली-

इस प्रणाली को निर्देशन प्रणाली भी कहा जाता है। इसके माध्यम से छात्रों को सामान्य रूप से एक दिशा का ज्ञान कराया जाता है। इस प्रणाली के द्वारा सूत्र रूप में तथा संक्षिप्त रूप में विषय को प्रतिपादित करके छात्रों को रचना के लिए प्रेरित किया जाता है।

8. अनुकरण प्रणाली-

इस प्रणाली में छात्रों के सामने कोई एक आदर्श रचना प्रस्तुत की जाती है। इस प्रकार की प्रस्तुत रचना भाषा एवं शैली की दृष्टि से अधिक उत्तम एवं अनुकरणीय होती है।

इसमें छात्रों को रचना को ध्यान पूर्वक अध्ययन करने के लिए कहा जाता है जिससे कि वे उसकी भाषा एवं शैली को ठीक प्रकार से समझ सकें।

इसके पश्चात छात्रों को पढ़ी गई रचना से मिलती जुलती एक अन्य संरचना लिखने को दी जाती है। छात्र उस रचना को उसी भाषा एवं शैली में लिखने का अभ्यास करते हैं।

9. तर्क प्रणाली-

इस प्रणाली में कोई भी धार्मिक, राजनैतिक तथा सामाजिक विषय ले लिया जाता है। छात्रों को दो समूहों में बांटकर उन्हें इन विषयों को परस्पर बांट दिया जाता है। छात्र इन विषयों पर आपस में तर्क या विचार विमर्श करते हैं। इस तरह वाद विवाद हो जाने के बाद छात्रों को रचना करने का आदेश दिया जाता है।

10. चित्र वर्णन प्रणाली-

इस प्रणाली में कक्षा में रोचकता उत्पन्न होती है एवं छात्रों की निरीक्षण शक्ति विकसित होती है। इस प्रणाली में रचना से संबंधित चित्र को दीवार पर टांग दिया जाता है।

शिक्षक छात्रों से चित्र की ओर संकेत कर के क्रमबद्ध प्रश्न पूछता है। उसके बाद चित्र को उल्टा करके रचना करने को कहा जाता है। चित्र वर्णन प्रणाली छोटे छात्रों के लिए रोचक एवं उत्साहवर्धक है।


रचना शिक्षण का महत्व (Rachna Shikshan Ka Mahatva In Hindi 2023)

रचना शिक्षण का महत्व निम्नलिखित कारणों से -
  • रचना के द्वारा छात्रों में लेखन शक्ति का विकास होता है।
  • छात्रों में रचना शिक्षण के द्वारा विवेचनात्मक शक्ति, विचार शक्ति तथा कल्पना शक्ति का विकास होता है।
  • रचना के द्वारा छात्रों में भाव अभिव्यक्ति, सृजनात्मक, रचनात्मक, शैलीगत एवं चिंतन आदि प्रवृत्तियों का विकास होता है।
  • रचना के द्वारा छात्रों में भाषागत, भाषा विज्ञानगत तथा व्याकरणगत नियमों का पालन स्पष्ट होता है।

रचना शिक्षण संबंधी सुझाव-

रचना शिक्षण संबंधी सुझाव निम्नलिखित हैं -
  1. रचना कार्य प्रदान करते समय छात्रों के मानसिक स्तर का ध्यान रखना चाहिए।
  2. लिखित रचना का संशोधन छात्रों के सामने ही किया जाना चाहिए।
  3. रचना के समय छात्रों को अभिव्यक्ति का पूर्ण अवसर प्रदान करना चाहिए।
  4. रचना न अधिक बडी और न अधिक संक्षिप्त होनी चाहिए।
  5. रचना में किसी भी तरह का विरोधाभास नहीं होना चाहिए।
  6. लिखित रचना से पहले मौखिक रचना आवश्यक रूप से करा लेनी चाहिए।
  7. रचना का विषय छोटी कक्षाओं में छात्रों की रुचि के अनुकूल होना चाहिए।
  8. रचना में अस्पष्ट वाक्यों का प्रयोग नहीं होना चाहिए।

निष्कर्ष:

तो दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हमने जाना है रचना शिक्षण के बारे में। रचना शिक्षण की विधियां, रचना शिक्षण के उद्देश्य तथा रचना शिक्षण के महत्व के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी प्राप्त की है। अगर आपको यह जानकारी पसंद आई हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें, ताकि उनको भी रचना शिक्षण से संबंधित जानकारी प्राप्त हो सके।

तो मिलते हैं आपसे अगले आर्टिकल पर तब तक के लिए नमस्कार।


आपके सवाल FAQ-

1. रचना शिक्षण की विधियां कौन-कौन सी है?

उत्तर - रचना शिक्षण की विधियां निम्नलिखित हैं-
  1. खेल प्रणाली
  2. प्रश्नोत्तर प्रणाली
  3. उद्बोधन प्रणाली
  4. रूपरेखा प्रणाली
  5. प्रवचन या व्याख्यान प्रणाली
  6. आदर्श प्रणाली
  7. प्रबोधन प्रणाली
  8. अनुकरण प्रणाली
  9. तर्क प्रणाली
  10. चित्र वर्णन प्रणाली

शायद आपको यह पसंद आ सकता है






धन्यवाद.....



एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

दोस्तों अगर आपको यह जानकारी पसंद आई है तो कृपया हमें कमेंट करके जरूर बताएं। धन्यवाद।

एक टिप्पणी भेजें (0)
3/related/default