नमस्कार दोस्तों आज के इस लेख में हम बात करेंगे Paryavaran Pradushan Par Nibandh के बारे में। दोस्तों आजकल आप जानते ही होंगे कि प्रदूषण कितना ज्यादा फैल रहा है जिसकी वजह से मनुष्य जीवन में बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
इसी के चलते आज हम पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध के बारे में चर्चा करेंगे। तो चलिए शुरू करते हैं -
(1)
-: पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध 500 शब्दों में (Paryavaran Pradushan Par Nibandh In Hindi) :-
"अपनी हालत का कुछ एहसास नहीं मुझको,
औरों से सुना है कि परेशान हूं मैं।
दुनिया में कुछ इस कदर छाया है प्रदूषण,
कि देखकर ये हाल हैरान हूँ मैं।।"
'प्रदूषण' एक ऐसा शब्द है, जिससे हर कोई नफरत करता है। दुनिया में किसी को भी प्रदूषण पसंद नहीं है चाहे वह इंसान हो या कोई पालतू जानवर हो हर कोई साफ सफाई जगह में रहना चाहता है और साफ-सुथरी जगह में अपना जीवन यापन करना चाहता है।
लेकिन फिर भी हम ना चाहते हुए भी प्रदूषण की दुनिया पर जी रहे हैं। तो आखिर प्रदूषण आता कहां से है? और इसे कौन बनाता है? इसके बारे में हम इस निबंध में चर्चा करेंगे। तो चलिए शुरू करते हैं पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध के बारे में।
सबसे पहले हम जानेंगे कि आखिर प्रदूषण क्या है? प्रदूषण के बारे में कुछ जानकारी देते हैं।
प्रदूषण क्या है? (What Is Pollution In Hindi) -
पर्यावरण के अजैविक घटकों जैसे जल, वायु, मिट्टी आदि के भौतिक, रासायनिक एवं जैविक अभिलक्षणों में होने वाला वह अवांछनीय परिवर्तन जो जीवन तथा जीवन आधारित तंत्रों पर नकारात्मक प्रभाव डालता है, प्रदूषण कहलता है।
मानवीय क्रियाकलापों से उत्पन्न अपशिष्ट उत्पादों से कुछ पदार्थ और ऊर्जा मुक्त होती है जिससे प्राकृतिक पर्यावरण में प्रायः हानिकारक परिवर्तन होते हैं, इसे पर्यावरण प्रदूषण कहा जाता है।
पर्यावरण प्रदूषण कई प्रकार के होते हैं जैसे कि -
जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, मृदा प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, भूमि प्रदूषण आदि कई तरह के पर्यावरण प्रदूषण पाए जाते हैं।
इन सभी Paryavaran Pradushan का मुख्य कारण मानवीय क्रियाकलापों से होने वाला प्रदूषण है। मतलब कि इन सभी प्रदूषण को फैलाने वाले में सबसे प्रथम हाथ मनुष्य का आता है।
क्योंकि हमारे दैनिक जीवन में होने वाले क्रियाकलापों से कई तरह के अपशिष्ट पदार्थ उत्पन्न होते हैं, जिनसे हमारा वातावरण तथा पर्यावरण प्रदूषित होता है। जो कि एक स्वच्छ मानव जीवन के लिए बहुत ही हानिकारक है।
पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध हिंदी में (Paryavaran Pradushan Par Nibandh In Hindi) :
पर्यावरण प्रदूषण के निबंध की रूपरेखा-
रूपरेखा : ( पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध) -
- प्रस्तावना
- प्रदूषण क्या है?
- प्रदूषण के कारण और प्रकार
- जल प्रदूषण
- वायु प्रदूषण
- भूमि प्रदूषण
- ध्वनि प्रदूषण
- रासायनिक प्रदूषण
- प्रदूषण की रोकथाम
- उपसंहार
#1. प्रस्तावना :-
हमारे चारों ओर फैला हुआ आवरण पर्यावरण कहलाता है। आजकल यह हर रूप से प्रदूषित हो रहा है। पर्यावरण प्रदूषण एक गंभीर समस्या का रूप ले चुका है और इसके साथ मानव समाज के जीवन मरण का महत्वपूर्ण प्रश्न जुड़ गया है।
हमारा दायित्व है कि समय रहते ही इस समस्या से समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाएँ। यदि इसके लिए आवश्यक उपाय नहीं किए गए तो प्रदूषण युक्त इस वातावरण में मानव जाति का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है।
आज मनुष्य अपनी सुख-सुविधाओं के लिए प्राकृतिक संपदाओं का अनुचित रुप से दोहन कर रहा है जिसके परिणाम स्वरुप ही प्रदूषण की समस्या सामने आई है।
#2. प्रदूषण क्या है? (Pradushan Kya Hai?) :-
सबसे पहले हमारे सामने यह प्रश्न उपस्थित होता है कि प्रदूषण है क्या चीज? तो जल, वायु व भूमि के भौतिक, रासायनिक या जैविक गुणों में होने वाला कोई भी अवांछनीय परिवर्तन प्रदूषण है।
एक ओर दुनिया तेजी से विकास कर रही है। जिंदगी को सजाने संवारने के नए तरीके ढूंढ रही हैं तो दूसरी ओर वह तेजी से प्रदूषित हो रही है। इस प्रदूषण के कारण जीना दूभर होता जा रहा है। आज आसमान जहरीले धुएं से भरता जा रहा है।
#3. प्रदूषण के कारण एवं प्रकार :-
सबसे पहले हम इस पर विचार करें कि हमारा पर्यावरण किन कारणों से प्रदूषित हो रहा है। आज हमारे विश्व की समस्त जनसंख्या की वृद्धि सबसे बड़ी समस्या है और Paryavaran Pradushan में जनसंख्या की वृद्धि ने भी अहम भूमिका का निर्वाह किया है।
-: पर्यावरण प्रदूषण के प्रकार :-
(Paryavaran Pradushan Ke Prakar)
पर्यावरण प्रदूषण के नम्नलिखित प्रकार हैं-
- जल प्रदूषण
- वायु प्रदूषण
- भूमि प्रदूषण
- ध्वनि प्रदूषण
- रासायनिक प्रदूषण
#3.1 जल प्रदूषण :
जल जीवन का आधार है। जल में अवांछित हानिकारक तत्वों का मिलना ही जल प्रदूषण कहलाता है। नदियों का पानी दूषित करने में बड़े कारखानों का सबसे बड़ा हाथ है।
कारखाने का सारा कूड़ा-कचरा नदी के हवाले कर दिया जाता है। बिना यह सोचे कि इनमें से बहुत कुछ पानी में घुल जाएगा जिससे मछलियां मर जाएंगी और मनुष्य के पीने योग्य पानी नहीं रहेगा।
#3.2 वायु प्रदूषण :
विभिन्न उद्योगों या कारखानों से निकलने वाला धुआँ वायु प्रदूषण फैलाता है। इस धुएं में उपस्थित सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड गैस वायुमंडल में घुल मिल जाती हैं। इस सृष्टि में तेल शोधक उद्योग, चीनी उद्योग अन्य उद्योगों की अपेक्षा अधिक प्रदूषण फैलाती हैं।
#3.3 भूमि प्रदूषण :
भूमि एक सीमित संसाधन है इसके दुरुपयोग के परिणाम भयंकर हो सकते हैं। भूमि में हानिकारक तत्वों को फैलाना जो ना तो प्राकृतिक रूप से अपघटित होते हैं और ना ही इनका पुनः चक्रीकरण हो पाता है भूमि प्रदूषण कहलाता है।
#3.4 ध्वनि प्रदूषण :
वातावरण में फैली ऐसी तीव्र ध्वनि जो कानों को अप्रिय लगती हैं और साथ ही मानसिक क्रियाओं में बाधा डालते हैं अर्थात शोर ही ध्वनि प्रदूषण का मुख्य रूप है।
#3.5 रासायनिक प्रदूषण :
विभिन्न उद्योगों से निकलने वाले रासायनों का विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों को नष्ट करना रासायनिक प्रदूषण कहलाता है।
#4. प्रदूषण की रोकथाम :-
वायु प्रदूषण को रोकने के लिए उद्योगों की चिमनियों की ऊंचाई बढ़ा देनी चाहिए जिससे निकली हुई हानिकारक गैसों के प्रभाव को कम किया जा सकता है। प्लास्टिक का प्रयोग कम से कम करना चाहिए। प्लास्टिक से समुद्र का तल बढ़ रहा है।
उद्योगों को शहरी आवासों से दूर एकांत में स्थापित करना चाहिए। जमीन (भूमि) में कचरा नहीं डालना चाहिए बल्कि कूड़ेदान में डालना चाहिए। जल प्रदूषण को रोकने के लिए आवश्यक है कि जल स्रोतों में गंदे पानी को ना डाला जाए तथा उद्योग धंधों से निर्गत पानी को भूमिगत किया जाए।
पर्यावरण संरक्षण में पर्यावरण संरक्षण के लिए वनों की रक्षा पर विशेष बल दिया जाना चाहिए। वृक्ष और वनस्पतियां वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं, तो यदि ये न रहेंगे तो हमें स्वच्छ ऑक्सीजन प्राप्त नहीं हो पाएगी।
यदि चाहते हो देश की सुरक्षा
तो प्रकृति को सुरक्षित करना होगा।
यदि नहीं करते प्रदूषण से सुरक्षा
तो कैसे हो पाएगी आत्म रक्षा।।
#5. उपसंहार :-
Paryavaran Pradushan नियंत्रण उपायों का उपयोग कर हम पर्यावरण प्रदूषण से मुक्ति पा सकते हैं। प्रदूषण कम करने के लिए दी गई तकनीकियों का प्रयोग करें। वैज्ञानिक सश्यता का अभिशाप प्रदूषण के रूप में ही सामने आया है। रोकथाम के उपायों को उपयोग करें और दूसरों को भी बताएं। किसी कवि ने ठीक ही कहा है -
कोई नहीं पराया मेरा
घर सारा संसार है
मैं कहता हूं जियो और
जीने दो इस संसार को।।
जीवन को सुरक्षित बनाने एवं बनाए रखने के लिए पर्यावरण प्रदूषण की समस्या पर नियंत्रण करना एक मौलिक आवश्यकता प्रत्येक नागरिक को चाहिए कि वह इस दिशा में योगदान दें।
***********************
(2)
-: पर्यावरण प्रदूषण निबंध 1000 शब्दों में (Paryavaran Pradushan Par Nibandh Hindi Me 2023) :-
रुप रेखा -
प्रस्तावना
प्रदूषण का अर्थ
प्रदूषण के प्रकार
प्रदूषण की समस्या से हानियां
प्रदूषण की समस्या का समाधान
उपसंहार
#1. प्रस्तावना -
हमारे सौर मंडल एवं धरती के चारों ओर परिवेश को पर्यावरण कहते हैं। जो सभी जीव जाति के विकास, जीवन और मृत्यु को प्रभावित करता है। आधुनिकीकरण के कारण एक समस्या उत्पन्न हो गई है जिसे पर्यावरण प्रदूषण की समस्या कहते हैं।
इस समस्या की ओर आजकल सभी देशों का ध्यान केंद्रित है। मानव क्रियाकलापों के कारण जल, वायु, जंगल, मिट्टी आदि सब कुछ प्रदूषित हो चुका है।
इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण का महत्व बताया जाना चाहिए क्योंकि यही हमारे अस्तित्व का आधार है। यदि हमने इस असंतुलन को दूर नहीं किया तो आने वाली पीढ़ियां खराब जीवन जीने को बाध्य होंगी और पता नहीं तब मानव जीवन होगा भी या नहीं।
#2. प्रदूषण का अर्थ -
हमारे पर्यावरण की प्राकृतिक संरचना एवं संतुलन में उत्पन्न अवांछसीय परिवर्तन को प्रदूषण कहा जाता है। यानी कि जो हमारा पर्यावरण है, उसकी जो प्राकृतिक संरचना है उसका जो संगठन है उसमें जितनी मात्रा में उचित मात्रा में जो तत्व पाए जाते हैं उसके संतुलन में यदि कोई अवांछनीय परिवर्तन हो जाता है उसी में कुछ तत्व ज्यादा यह कोई तत्व अधिक हो जाता है तो उसे ही प्रदूषण कहा जाता है।
प्रकृति के द्वारा प्रदान किया गया पर्यावरण जीवधारियों के लिए अनुकूल होता है। और जब वातावरण में कुछ हानिकारक घटक आ जाते हैं तो वे वातावरण का संतुलन बिगाड़ देते हैं। यह गंदा वातावरण धारियों के लिए अनेक प्रकार से हानिकारक होता है नुकसान दायक होता है। इस प्रकार वातावरण के दूषित हो जाने को ही प्रदूषण कहा जाता है।
#3. प्रदूषण के प्रकार -
आज के वातावरण में प्रदूषण कई रूपों में दिखाई देता है, जैसे- वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, रेडियोधर्मी प्रदूषण, रासायनिक प्रदूषण या मृदा प्रदूषण आदि।
क.) वायु प्रदूषण :
वायु जीवन का अनिवार्य स्त्रोत है। प्रत्येक प्राणी को स्वस्थ रुप से जीने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। इसलिए वायुमंडल में शुद्ध वायु मतलब ऑक्सीजन का विशेष अनुपात में होना आवश्यक है। जंतु सांस द्वारा ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड निकालते हैं। अर्थात् जंतु सांस द्वारा ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) को निकालते हैं।
लेकिन पौधे इसके उल्टा करते हैं कार्बन डाइऑक्साइड को ग्रहण करते हैं और ऑक्सीजन हमें प्रदान करते हैं। इस तरह से संतुलन बना रहता है। इससे वायुमंडल में शुद्धता बनी रहती है। आजकल वायुमंडल में ऑक्सीजन गैस का संतुलन बिगड़ गया है
और वायु अनेक हानिकारक गैसों से प्रदूषित हो गई है। इसे ही वायु प्रदूषण कहा जाता है। कुल मिलाकर कहा जाए तो वायु में होने वाला अवांछनीय परिवर्तन ही वायु प्रदूषण कहलाता है।
ख.) जल प्रदूषण :
जल में पाए जाने वाले आवश्यक तत्वों में होने वाला अवांछनीय परिवर्तन "जल प्रदूषण" कहलाता है। यानि जल का एक संगठन होता है उसमें कुछ आवश्यक तत्व जिनका संगठन होता है वो पाए जाते हैं संतुलित मात्रा में पूर्ण मात्रा में।
यदि उनमें कोई कुछ ज्यादा हो जाता है कोई तो कम हो जाता है या अवांछनीय तत्व मिल जाता है, तो उसे ही जल प्रदूषण कहा जाता है। जल को जीवन कहा जाता है इसके बिना जीव जंतु और पेड़-पौधों का अस्तित्व नहीं है। फिर भी, बड़े बड़े नगरों के गंदे नाले और सीवर नदियों के जल में आकर मिला दिए जाते हैं।
कारखानों का सारा अपशिष्ट बहकर नदियों के जल में आकर मिलता है इससे जल दूषित हो गया है जिससे भयानक बीमारियां उत्पन्न हो रही हैं। जिससे लोगों का जीवन खतरे में पड़ गया है।
तो हम सभी लोग जानते हैं कि जो जल प्रदूषण है वह बड़े बड़े कारखानों से निकले अपशिष्ट पदार्थों को नदियों में डालने या बहाने से ही होता है। तो जल का दूषित होना ही जल प्रदूषण है। और इससे बहुत सारी बीमारियां उत्पन्न हो जाती है।
ग.) ध्वनि प्रदूषण :
आवश्यकता से अधिक ध्वनि का होना ध्वनि प्रदूषण कहलाता है। यानि जितनी आवश्यकता है यदि उससे अधिक ध्वनि हो रही है तो ध्वनि प्रदूषण की श्रेणी में आती है। अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण आज की नई समस्या है।
मोटर, कार, ट्रैक्टर, जेट विमान, कारखानों के सायरन, मशीनें, लाउडस्पीकर, ध्वनि के संतुलन को बिगाड़ कर ध्वनि प्रदूषण उत्पन्न करते हैं। अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण से मानसिक विकृति को जाती है, तीव्र क्रोध आता है, अनिद्रा हो जाती है, चिड़चिड़ापन जैसी मानसिक समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं।
घ.) मृदा प्रदूषण :
मिट्टी में होने वाले Pradushan को मृदा प्रदूषण कहा जाता है। यह मुख्य रूप से कृषि में अत्यधिक रोग नाशक, कीटनाशक के लिए जो रसायनों का प्रयोग किया जाता है या दवाओं का प्रयोग किया जाता है या कीड़े मकोड़ों को मारने के लिए खरपतवारों को हटाने के लिए इन रसायनों के प्रयोग से मृदा प्रदूषण होती है।
इसी के साथ उससे जल प्रदूषण भी हो जाता है। क्योंकि जब वर्षा ऋतु में पानी बरसता है तब वे दवाइयां इधर-उधर बह जाती हैं तो इससे जल प्रदूषण भी हो जाता है। मृदा प्रदूषण होने पर उत्पादन क्षमता कम हो जाती है।
फसलों एवं वनस्पतियों का विकास कम हो जाता है। मृदा प्रदूषण के कारण सूक्ष्म जीव, बैक्टीरिया आदि की मृत्यु हो जाती है जिससे मिट्टी की गुणवत्ता खत्म हो जाती है।
ड़.) रेडियोधर्मी प्रदूषण :
आज के युग में वैज्ञानिक परीक्षणों का जोर है। परमाणु परीक्षण निरंतर होते ही रहते हैं। इसके विस्फोट से रेडियोधर्मी पदार्थ संपूर्ण वायुमंडल में फैल जाते हैं और अनेक प्रकार से जीवन को छति पहुंचाते हैं, नुकसान पहुंचाते हैं और बीमार करते हैं।
#4. प्रदूषण से हानियां -
बढ़ती हुई जनसंख्या और औद्योगीकरण ने प्रदूषण की समस्या पैदा कर दी है। कारखानों से निकलने वाले धुएं से विषैले कचरे के बहाव से तथा जहरीली गैसों के रिसाव से आज मानव जीवन समस्या ग्रस्त हो गया है।
इस प्रदूषण से मनुष्य जानलेवा बीमारियों का शिकार हो रहा है। कोई अपंग होता है तो कोई बहरा हो जाता है किसी को देखने की शक्ति नहीं है यानी वह सही से देख नहीं पाता है उसकी आंखें खराब हो गई है तो किसी का जीवन चला जा रहा है। विविध प्रकार की शारीरिक विकृतियाँ, मानसिक कमजोरी, असाध्य कैंसर जैसे रोगों का मूल कारण विषैला वातावरण ही है।
#5. प्रदूषण की समस्या का समाधान -
वातावरण को प्रदूषित होने से बचाने के लिए वृक्षारोपण करना चाहिए। दूसरी ओर वृक्षों के अधिक कटाव पर भी रोक लगाई जानी चाहिए क्योंकि मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए पेड़ों की अंधाधुंध कटाई करते रहे हैं अतः इनको रोका जाना चाहिए।
कारखाने और मशीनें लगाने की अनुमति उन्हीं लोगों को दी जानी चाहिए जो औद्योगिक कचरे और मशीनों के धुएँ को बाहर निकालने की समुचित व्यवस्था कर सकें। तेज ध्वनि वाले वाहनों पर साइलेंसर लगा होना चाहिए और सार्वजनिक रूप से लाउडस्पीकरों आदि के प्रयोग पर रोक लगानी चाहिए।
पर्यावरण प्रदूषण की समस्या को हम कई तरह से खत्म कर सकते हैं जैसे - प्रदूषण से पर्यावरण को बचाने के लिए पेड़ों की कम से कम कटाई की जानी चाहिए और प्रदूषण के लिए सरकार को उचित कदम उठाने होंगे और इसके विरुद्ध नए कानून जारी करने होंगे।
हर मनुष्य को कूड़े के ढेर और गंदगी आदि को जल या जलाशय में नहीं डालना चाहिए। मनुष्य को कोयला, पेट्रोलियम जैसे उत्पादों का बहुत कम प्रयोग करना चाहिए और जितना हो सके प्रदूषण रहित विकल्पों को अपनाना चाहिए। मनुष्य को सौर ऊर्जा, CNG, वायु ऊर्जा, बायोगैस, रसोई गैस, पनबिजली का अधिक प्रयोग करना चाहिए। ऐसा करने से वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण को कम करने में बहुत ही सहायता मिलेगी।
नदियों के जल को कचरे से बचाना चाहिए और पानी को रिसाइकलिंग की सहायता से पीने योग्य बनाना चाहिए। प्लास्टिक के बैग का कम प्रयोग करना चाहिए। जिन्हें रिसाइकल किया जा सके उनका प्रयोग अधिक करना चाहिए। प्रदूषण को खत्म करने के लिए कानूनों और नियमों का पालन करना चाहिए।
#6. उपसंहार -
भारत सरकार Paryavaran Pradushan की समस्या के प्रति जागरूक है उसने सन 1974 ईस्वी में जल प्रदूषण निवारण अधिनियम लागू किया था। इसके अंतर्गत एक केंद्रीय बोर्ड तथा प्रदेशों में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड गठित की गए हैं।
इसी प्रकार नए उद्योगों को लाइसेंस देने और वनों की कटाई रोकने की दिशा में कठोर नियम बनाए गए हैं। इस बात के भी प्रयास किए जा रहे हैं कि नए वन क्षेत्र बनाए जाए और जन सामान्य को वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
न्यायालय द्वारा Pradushan फैलाने वाले उद्योगों को महानगरों से बाहर ले जाने के आदेश दिए गए हैं यदि जनता भी अपने ढंग से इन कार्यक्रमों में सक्रिय सहयोग दे और यह संकल्प लें कि जीवन में आने वाले प्रत्येक शुभ अवसर पर कम से कम एक वृक्ष अवश्य लगाएगी
। तो निश्चित ही हम प्रदूषण के दुष्परिणामों से बच सकेंगे और आने वाली पीढ़ियों को भी इसकी काली छाया से बचाने में समर्थ होंगे। इसी के साथ आप सभी लोग खूब सारे पेड़ लगाएं, धन्यवाद।
निष्कर्ष :
तो दोस्तों आज के इस लेख में हमने Paryavaran Pradushan Par Nibandh in Hindi के बारे में चर्चा की है और बताया है कि पर्यावरण प्रदूषण क्या है तथा इसके कितने प्रकार हैं और पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के कौन-कौन से उपाय हैं।
इन सभी चीजों के बारे में आज के इस लेख में डिस्कस किया गया है। तो उम्मीद करते हैं आपको यह लेख पसंद आया होगा, अगर पसंद आया है तो कृपया इसे अपने दोस्तों के साथ भी जरूर शेयर करें ताकि उनको भी पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध के बारे में जानकारी प्राप्त हो सके धन्यवाद।
FAQs -
इंटरनेट पर पूछे जाने वाले कुछ सवालों के उत्तर
Q. पर्यावरण प्रदूषण के मुख्य कारण क्या है?
A. पर्यावरण प्रदूषण के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं -
अधिक जनसंख्या वृद्धि
उद्योग धंधे
वाहन
कारखाने आदि
Q. पर्यावरण प्रदूषण के चार प्रकार क्या है?
A. पर्यावरण प्रदूषण के प्रकार -
जल प्रदूषण
वायु प्रदूषण
ध्वनि प्रदूषण
मृदा प्रदूषण
Q. विश्व में प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत क्या है?
A. विश्व में प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत सीवज, कचरा और कारखाने हैं।
Q. पर्यावरण प्रदूषण को कैसे रोका जा सकता है?
A. पर्यावरण प्रदूषण की समस्या को हम कई तरह से खत्म कर सकते हैं जैसे - प्रदूषण से पर्यावरण को बचाने के लिए पेड़ों की कम से कम कटाई की जानी चाहिए और प्रदूषण के लिए सरकार को उचित कदम उठाने होंगे और इसके विरुद्ध नए कानून जारी करने होंगे। हर मनुष्य को कूड़े के ढेर और गंदगी आदि को जल या जलाशय में नहीं डालना चाहिए
Q. प्रदूषण के पांच कारण क्या है?
A. प्रदूषण के पांच कारण निम्नलिखित हैं-
बढ़ती जनसंख्या
वनों की कटाई
कारखाने
वाहनों की वृद्धि
उद्योग धंधे
आपको यह पसंद आ सकता है
दोस्तों अगर आपको यह जानकारी पसंद आई है तो कृपया हमें कमेंट करके जरूर बताएं। धन्यवाद।