शृंगार रस की परिभाषा बताइए उदाहरण सहित | Shringar Ras Ki Paribhasha Udaharan Sahit 2023

AKHILESH KUMAR
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नमस्कार दोस्तों आज के इस लेख में हम आपको बताएंगे Shringar Ras Ki Paribhasha के बारे में पूरी जानकारी और उसके साथ Shringar Ras Ka Udaharan के बारे में भी बात करेंगे। तो आज का यह लेख बहुत ही महत्वपूर्ण है।


दोस्तों यह एक ऐसा प्रश्न है जो हिंदी व्याकरण में एक श्रंगार की तरह ही काम करता है। और साथ में यह प्रश्न इतना महत्वपूर्ण है कि परीक्षा में भी इसके बारे में पूछा जाता है। इसलिए आपको Shringar Ras Ki Paribhasha In Hindi के बारे में जानकारी होना जरूरी है।


तो अगर आपको शृंगार रस की परिभाषा के बारे में जानना है तो इस लेख को पूरा अंतर जरूर पढ़ें जिससे आपको श्रंगार रस की परिभाषा के बारे में पूरी जानकारी हो सके और आप परीक्षा में भी अच्छे अंक पा सकें, क्योंकि यह प्रश्न परीक्षा में भी पूछा जा सकता है। तो चलिए शुरू करते हैं श्रंगार रस की परिभाषा के बारे में।


शृंगार रस की परिभाषा उदाहरण सहित (Shringar Ras Ki Paribhasha) :-


Shringar Ras Ki Paribhasha & Udahran In Hindi



श्रंगार रस की परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं -

शृंगार रस (Shringar Ras) - श्रृगार रस का स्थाई भाव "रति" है।


Shringar Ras की परिभाषा :

श्रृंगार रस जो होता है वह नायक-नायिका, पति-पत्नी, प्रेमी-प्रेमिका के बीच का प्रेम होता है। जब नायक-नायक, पति-पत्नी, प्रेमी-प्रेमिका इत्यादि के बीच का प्रेम दिखाया जाता है तो वहां Shringar Ras होता है।

(1)

जब सहृदय के हृदय में रति नामक स्थाई भाव का जब विभाव  अनुभाव, और संचारी भाव के साथ संयोग होता है, तो वहां पर श्रंगार रस पाया जाता है।

उदा.

राम को रूप निहारती जानकी, कंगन के नग की परछाई।

यातै सबै सुधि भूल गई, कर टेक रही पल तारत नाहिं।।

(2)

इसका स्थाईभाव "रति" है। जब "रति" नामक स्थाई भाव, विभाव, अनुभाव तथा संचारी भाव के संयोग से श्रंगार रस की उत्पत्ति होती है।

उदा.

मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई।

जाके सिर मोर मुकुट, मेरो पति सोई।।


Ras Kise कहते हैं?


श्रृंगार रस के प्रकार :-

श्रंगार रस दो प्रकार का होता है

1. संयोग श्रृंगार और 2. वियोग श्रृंगार। वियोग श्रृंगार का दूसरा नाम "विप्रलंभ श्रृंगार"‌ भी है।

1. संयोग श्रृंगार :

संयोग श्रृंगार में नायक-नायिका, प्रेमी-प्रेमिका, स्त्री-पुरुष, पति-पत्नी आदि के बीच का प्रेम दिखाया जाता है जब वे पास रहते हैं।

2. वियोग श्रृंगार :

जब नायक नायिका प्रेमी-प्रेमिका पति-पत्नी आदि एक दूसरे से दूर रहते हैं और एक दूसरे से प्रेम पाने की ललक, चाह या एक दूसरे से दूर रहने की जो पीड़ा दर्शाई जाती है, वहां पर वियोग श्रृंगार होता है।

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संयोग श्रृंगार के लक्षण -

चलिए अब बात करते हैं संयोग श्रृंगार के लक्षण के बारे में। लेकिन यह लक्षण पूरी तरह से सत्य नहीं कह सकते लेकिन लेकिन 99% तक उम्मीद लगा सकते हैं कि इनमें ऐसे दृश्य या ऐसी स्थितियां उत्पन्न होगी, जिसे हम कह सकते हैं कि यहां पर संयोग श्रृंगार रस होगा।

स्थाई भाव ➡ रति

संचारी भाव ➡ जो कुछ क्षण के लिए भाव रहता है जैसे - हर्ष, उन्माद, स्मृति, लज्जा, मोह, आवेग, मद।

आश्रय ➡ वह व्यक्ति जिसके अंदर प्रेम का भाव हो। जिसमें नायक-नायिका, प्रेमी-प्रेमिका, पति-पत्नी, स्त्री-पुरुष आदि हो सकते हैं।

विषय ➡ अगर नायक आश्रय है तो नायिका विषय का कार्य करने लगती है। नायक-नायिका या पति-पत्नी का प्रेम

अनुभाव ➡ व्यक्ति प्रेम के विषय में कुछ चीजें अनुभव करता है। जैसे - मधुर, आलाप, आलिंगन, रोमांच आदि

उद्दीपन ➡ जो प्रेम को तीव्र करता है। एकांत, वन-उपवन, नदी किनारा आदि उद्दीपन का कार्य करते हैं।


उदाहरण ➡

एक जंगल है तेरी आंखों में,

मैं जहां राह भूल जाता हूं।

तू किसी रेल सी गुजरती है,

मैं किसी पुल सा थरथराता हूं।।


अब यहां पर प्रेमी (कोई नायक) आश्रय है, और विषय नायिका है क्योंकि यहाँ नायिका के बारे में बात की जा रही है, और नायक आश्रय कर रहा है।

एक जंगल है तेरी आंखों में - यहां पर नायिका की आंखों की गहराई (जंगल) उद्दीपन का कार्य कर रही है।

जहां मैं राह भूल जाता हूं - यहां पर 'राह भूल जाना' अनुभाव का कार्य करता है। जोकि नायक कर रहा है।



वियोग श्रृंगार के लक्षण -

स्थाई भाव ➡ अति

संचारी भाव ➡ उग्रता, संत्रास

आलंबन (विषय) ➡ श्री कृष्ण का वियोग

आश्रय ➡ गोपियां

अनुभाव ➡ अश्रु (चेष्टा)

उद्दीपन ➡ मथुरा की स्मृतियां (पावस ऋतु)


उदाहरण ➡

निसिदिन बरसत नैन हमारे,

सदा रहत पावस ऋतु हम पर

जब से श्याम सिधारे



भावार्थ:

यहां पर उस स्थिति का वर्णन हो रहा है जब श्री कृष्ण जी गोपियों को छोड़कर चले गए थे। जैसे गोपिया कहती हैं कि हमारी आंखों से दिन-रात आंसू बरसते रहते हैं, और हमारे ऊपर हमेशा ही वर्षा ऋतु रहती है मतलब आंखों से पानी बरसता ही रहता है। जब से श्याम यानी श्री कृष्ण जी हमें (गोपियों को) छोड़कर चले गए।

तो इस उदाहरण में यह निष्कर्ष निकलता है कि गोपियां चिंतित हो रही है कि श्री कृष्ण जी हमको छोड़कर चले गई है जिससे उनकी याद में हमारी आंखों से आंसू गिरते ही रहते हैं।



श्रृंगार रस के उदाहरण (Shringar Ras Ke Udaharan) :-

श्रृंगार रस के निम्नलिखित उदाहरण है स्टेप बाय स्टेप

संयोग श्रृंगार रस के उदाहरण

(1)

एक जंगल है तेरी आंखों में,

मैं जहां राह भूल जाता हूं।

तू किसी रेल सी गुजरती है,

मैं किसी पुल सा थरथराता हूं।।

(2)

बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाय।

सौंह करै भौहनि हसै, देन कहै नट जाए।।

(3)

मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई।

जाके सिर मोर मुकुट मेरो पति सोई।।

(4)

तरनि तनूजा तट तमाल, तरुवर बहु छाए।

झके कूल सों जल परसन हित मनहुँ सुहाए।।

(5)

बसो मेरे नैनन में नंदलाल

मोर मुकुट मकराकृत कुंडल

अरुण तिलक दिए भाल



वियोग शृंगार रस के उदाहरण

(1)

निसिदिन बरसत नैन हमारे,

सदा रहत पावस ऋतु हम पर

जब से श्याम सिधारे

(2)

पुनि वियोग सिंगार हूँ हीन्हौं है समुझाई।

ताहि को इन चारि विधि, बरनत हैं कबिराई।।

(3)

इन काहु सेयो नहीं पाय सेयती नाम।

आजु भाल बनि चहत तुव कुच सिव सेयो बाम।।

(4)

बेलि चली बिटपन मिली चपला घन तन माँहि।

कोऊ नहि छिति गगन मैं तिया रही तजि नाहि।।

(5)

दरद कि मारी वन वन डोलू,

वैध मिला नाहि कोई।

मीरा के प्रभु पीर मिटै,

जब वैद्य सांवलिया होई।।



निष्कर्ष :

तो दोस्तों आज के इस लेख में हमने आपको बताया है श्रंगार रस के बारे में Shringar Ras की परिभाषा और उसके उदाहरण कौन-कौन से हैं? इसके बारे में विस्तार पूर्वक और आसान भाषा में समझाने की कोशिश की है। तो उम्मीद करते हैं आपको यह लेख पसंद आया होगा। तो अगर आपको यह लेख पसंद आया है तो इसे अपने दोस्तों के साथ भी जरूर शेयर करें ताकि उनको भी श्रृंगार रस की परिभाषा और उदाहरण के बारे में जानकारी प्राप्त हो सके। धन्यवाद।

FAQ's

Q. शृंगार रस की परिभाषा क्या है?

A. जब सहृदय के हृदय में रति नामक स्थाई भाव का जब विभाव  अनुभाव, और संचारी भाव के साथ संयोग होता है, तो वहां पर श्रंगार रस पाया जाता है।

Q. श्रृंगार रस के कितने भेद हैं? उदाहरण सहित बताइए।

A. श्रृंगार रस के दो भेद हैं -
1. संयोग श्रृंगार रस, 2. वियोग श्रृंगार रस


संयोग श्रृंगार रस के उदाहरण ➡

बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाय।

सौंह करै भौहनि हसै, देन कहै नट जाए।।


वियोग श्रृंगार रस के उदाहरण ➡

पुनि वियोग सिंगार हूँ हीन्हौं है समुझाई।

ताहि को इन चारि विधि, बरनत हैं कबिराई।।



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