नमस्कार दोस्तों आज के इस लेख में हम आपको बताएंगे Shringar Ras Ki Paribhasha के बारे में पूरी जानकारी और उसके साथ Shringar Ras Ka Udaharan के बारे में भी बात करेंगे। तो आज का यह लेख बहुत ही महत्वपूर्ण है।
दोस्तों यह एक ऐसा प्रश्न है जो हिंदी व्याकरण में एक श्रंगार की तरह ही काम करता है। और साथ में यह प्रश्न इतना महत्वपूर्ण है कि परीक्षा में भी इसके बारे में पूछा जाता है। इसलिए आपको Shringar Ras Ki Paribhasha In Hindi के बारे में जानकारी होना जरूरी है।
तो अगर आपको शृंगार रस की परिभाषा के बारे में जानना है तो इस लेख को पूरा अंतर जरूर पढ़ें जिससे आपको श्रंगार रस की परिभाषा के बारे में पूरी जानकारी हो सके और आप परीक्षा में भी अच्छे अंक पा सकें, क्योंकि यह प्रश्न परीक्षा में भी पूछा जा सकता है। तो चलिए शुरू करते हैं श्रंगार रस की परिभाषा के बारे में।
शृंगार रस की परिभाषा उदाहरण सहित (Shringar Ras Ki Paribhasha) :-
Shringar Ras की परिभाषा :
(1)
जब सहृदय के हृदय में रति नामक स्थाई भाव का जब विभाव अनुभाव, और संचारी भाव के साथ संयोग होता है, तो वहां पर श्रंगार रस पाया जाता है।
उदा.
राम को रूप निहारती जानकी, कंगन के नग की परछाई।
यातै सबै सुधि भूल गई, कर टेक रही पल तारत नाहिं।।
(2)
इसका स्थाईभाव "रति" है। जब "रति" नामक स्थाई भाव, विभाव, अनुभाव तथा संचारी भाव के संयोग से श्रंगार रस की उत्पत्ति होती है।
उदा.
मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई।
जाके सिर मोर मुकुट, मेरो पति सोई।।
श्रृंगार रस के प्रकार :-
1. संयोग श्रृंगार और 2. वियोग श्रृंगार। वियोग श्रृंगार का दूसरा नाम "विप्रलंभ श्रृंगार" भी है।
1. संयोग श्रृंगार :
2. वियोग श्रृंगार :
क्या आप जानते हैं?
संयोग श्रृंगार के लक्षण -
संचारी भाव ➡ जो कुछ क्षण के लिए भाव रहता है जैसे - हर्ष, उन्माद, स्मृति, लज्जा, मोह, आवेग, मद।
आश्रय ➡ वह व्यक्ति जिसके अंदर प्रेम का भाव हो। जिसमें नायक-नायिका, प्रेमी-प्रेमिका, पति-पत्नी, स्त्री-पुरुष आदि हो सकते हैं।
विषय ➡ अगर नायक आश्रय है तो नायिका विषय का कार्य करने लगती है। नायक-नायिका या पति-पत्नी का प्रेम
अनुभाव ➡ व्यक्ति प्रेम के विषय में कुछ चीजें अनुभव करता है। जैसे - मधुर, आलाप, आलिंगन, रोमांच आदि
उद्दीपन ➡ जो प्रेम को तीव्र करता है। एकांत, वन-उपवन, नदी किनारा आदि उद्दीपन का कार्य करते हैं।
उदाहरण ➡
एक जंगल है तेरी आंखों में,
मैं जहां राह भूल जाता हूं।
तू किसी रेल सी गुजरती है,
मैं किसी पुल सा थरथराता हूं।।
एक जंगल है तेरी आंखों में - यहां पर नायिका की आंखों की गहराई (जंगल) उद्दीपन का कार्य कर रही है।
जहां मैं राह भूल जाता हूं - यहां पर 'राह भूल जाना' अनुभाव का कार्य करता है। जोकि नायक कर रहा है।
वियोग श्रृंगार के लक्षण -
स्थाई भाव ➡ अति
आलंबन (विषय) ➡ श्री कृष्ण का वियोग
आश्रय ➡ गोपियां
उद्दीपन ➡ मथुरा की स्मृतियां (पावस ऋतु)
उदाहरण ➡
निसिदिन बरसत नैन हमारे,
सदा रहत पावस ऋतु हम पर
जब से श्याम सिधारे
श्रृंगार रस के उदाहरण (Shringar Ras Ke Udaharan) :-
संयोग श्रृंगार रस के उदाहरण
(1)
एक जंगल है तेरी आंखों में,
मैं जहां राह भूल जाता हूं।
तू किसी रेल सी गुजरती है,
मैं किसी पुल सा थरथराता हूं।।
(2)
बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाय।
सौंह करै भौहनि हसै, देन कहै नट जाए।।
(3)
मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई।
जाके सिर मोर मुकुट मेरो पति सोई।।
(4)
तरनि तनूजा तट तमाल, तरुवर बहु छाए।
झके कूल सों जल परसन हित मनहुँ सुहाए।।
(5)
बसो मेरे नैनन में नंदलाल
मोर मुकुट मकराकृत कुंडल
अरुण तिलक दिए भाल
वियोग शृंगार रस के उदाहरण
(1)
निसिदिन बरसत नैन हमारे,
सदा रहत पावस ऋतु हम पर
जब से श्याम सिधारे
(2)
पुनि वियोग सिंगार हूँ हीन्हौं है समुझाई।
ताहि को इन चारि विधि, बरनत हैं कबिराई।।
(3)
इन काहु सेयो नहीं पाय सेयती नाम।
आजु भाल बनि चहत तुव कुच सिव सेयो बाम।।
(4)
बेलि चली बिटपन मिली चपला घन तन माँहि।
कोऊ नहि छिति गगन मैं तिया रही तजि नाहि।।
(5)
दरद कि मारी वन वन डोलू,
वैध मिला नाहि कोई।
मीरा के प्रभु पीर मिटै,
जब वैद्य सांवलिया होई।।
निष्कर्ष :
FAQ's
बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाय।
सौंह करै भौहनि हसै, देन कहै नट जाए।।
वियोग श्रृंगार रस के उदाहरण ➡
पुनि वियोग सिंगार हूँ हीन्हौं है समुझाई।
ताहि को इन चारि विधि, बरनत हैं कबिराई।।


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