मनुष्य का तंत्रिका तंत्र क्या है? तंत्रिका तंत्र के कार्य | Manushya Ka Tantrika Tantra In Hindi - 2023

AKHILESH KUMAR
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नमस्कार दोस्तों आज के इस आर्टिकल में जानेंगे मनुष्य के तंत्रिका तंत्र के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी। जैसे कि तंत्रिका तंत्र क्या है? तथा तंत्रिका तंत्र के कार्य, मनुष्य की तंत्रिका तंत्र के कितने भाग होते हैं? एवं मस्तिष्क के कार्य आदि। तो आइए शुरू करते हैं -

तंत्रिका तंत्र क्या है? (Tantrika Tantra kya Hai in Hindi)

मनुष्य का तंत्रिका तंत्र क्या है? तंत्रिका तंत्र के कार्य Manushya Ka Tantrika Tantra In Hindi

प्राणियों में समझने सोचने और किसी भी चीज को याद रखने के साथ-साथ शरीर के विभिन्न अंगों के कार्यों में समन्वय और संतुलन स्थापित करके नियंत्रण बनाए रखने वाला तंत्र तंत्रिका तंत्र है।

तंत्रिका तंत्र के कार्य (Tantrika Tantra Ke Karya)

मनुष्य के तंत्रिका तंत्र के निम्नलिखित कार्य हैं -
  1. शरीर की सभी क्रियाओं का नियमन एवं नियंत्रण करता है।
  2. इसके संवेदी अंगों के द्वारा बाहरी वातावरण में होने वाली क्रियाओं को प्राप्त करता है।
  3. प्रतिवर्ती क्रिया द्वारा शरीर की रक्षा करता है।
  4. शरीर के सभी ऊतकों एवं अंगों में समन्वय स्थापित करता है।
  5. आंतरिक वातावरण का नियंत्रण करता है।

मनुष्य का तंत्रिका तंत्र |Manushya Ka Tantrika Tantra) :

मनुष्य एवं अन्य कशेरुक प्राणियों के तंत्रिका तंत्र को तीन भागों में विभाजित किया जाता है।

  •  केंद्रीय तंत्रिका तंत्र
  •  परिधीय तंत्रिका तंत्र
  •  स्वायतः तंत्रिका तंत्र

1. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र :

तंत्रिका तंत्र का यह प्रमुख भाग है जो संपूर्ण शरीर अंगों, तंत्रों एवं स्वयं तंत्रिका तंत्र को नियंत्रित करता है। इसमें दो भाग मस्तिष्क एवं सुषुम्ना रज्जू (स्पाइनल कार्ड) आते हैं।

मस्तिष्क (Brain) -
मनुष्य का तंत्रिका तंत्र क्या है? तंत्रिका तंत्र के कार्य || Manushya Ka Tantrika Tantra In Hindi

मनुष्य का मस्तिष्क खोपड़ी (Skull) में सुरक्षित रहता है। मनुष्य के मस्तिष्क का कुल भार 1400 ग्राम या 3 पाउंड होता है।

यह तंत्रिका तंत्र का प्रमुख केंद्र बिंदु होता है, जिसके द्वारा मनुष्य के शरीर की विभिन्न जैविक क्रियाओं का नियंत्रण होता है।

मस्तिष्क की संरचना (Mastishk Ki Sanrachna in Hindi)

अध्ययन की सुविधा के लिए मस्तिष्क को तीन भागों में विभाजित किया जाता है -
  1. अग्र मस्तिष्क (Fore Brain)
  2. मध्य मस्तिष्क (Mid Brain)
  3. पश्च स्थिति (Hind Brain)

(1.) अग्र मस्तिष्क -

यह मस्तिष्क का सबसे आगे का भाग होता है। यह प्रमस्तिष्क एवं हायपोथैलेमस का बना होता है।

a. प्रमस्तिष्क (Cerebrum)

मनुष्य के मस्तिष्क का यह भाग सबसे अधिक विकसित होता है। यह पूरे मस्तिष्क का 2/3 भाग होता है। प्रमस्तिष्क की बाहरी सतह पर गायरी / उभार (Gyri) एवं सल्साई/खाँच (Sulci) के वलन एवं दरारें पाई जाती हैं।

प्रमस्तिष्क दो गोलार्धों का बना होता है। दोनों प्रमस्तिषक गोलार्धों को आपस में जोड़ने वाली अनुप्रस्थ पट्टिका को कार्पस कैलोसम (Corpus Callosum) कहते हैं।

प्रमस्तिष्क गोलार्ध चार पिण्डों में विभाजित होता है। प्रमस्तिष्क गोलार्धों की बाहरी स्तर को कॉर्टेक्स कहते हैं। यह धूसर पदार्थ (Grey Matter) से बना होता है। इसका आंतरिक भाग सफेद पदार्थ का बना होता है।

"जिस प्राणी एवं मनुष्य में प्रमस्तिष्क जितना बड़ा तथा जितनी अधिक गायरी एवं सल्साई पाई जाती हैं वह उतना ही अधिक बुद्धिमान होता है।" प्रमस्तिष्क गोलार्ध के अग्र सिरे पर दो पिण्ड घ्राण पिण्ड होते हैं।


पढ़ें - नियंत्रण एवं समन्वय क्या है?


b. हायपोथैलेमस -

प्रमस्तिष्क गोलार्धों का आधारीय एवं पार्श्व भाग हाइपोथैलेमस कहलाता है, तथा यह भाग तंत्रिका तंत्र का संगठन केंद्र होता है।

प्रमस्तिष्क गोलार्धों के नीचे एक छोटा भाग डायनसेफैलान स्थित होता है जो कि एक कीप समान संरचना के द्वारा ढंका रहता है। इससे एक अंतः स्रावी ग्रंथि पीयूष ग्रंथि जुड़ी रहती है।


(2.) मध्य मस्तिष्क -

यह भाग अग्र मस्तिष्क को पश्च मस्तिष्क से जोड़ता है। यह दो भागों कार्पोरा क्वाड्रीजेमिना एवं प्रमस्तिष्क तंतु का बना होता है। कॉरपोरा क्वाड्रीजेमिना दो जोड़ी गोलाकार ठोस संरचनाओं के रूप में होता है। यह दोनों गोलाकार भाग दृष्टि एवं श्रवण उद्दीपन को ग्रहण करते हैं।

(3.) पश्च मस्तिष्क -

यह अनुमस्तिष्क, पाॅन्स वेरोलाई एवं मेड्यूला आब्लाॅगेंटा का बना होता है।

a. अनुमस्तिष्क -

यह मस्तिष्क का ठोस पीछे का भाग है। यह अंग विन्यास एवं शारीरिक संतुलन को बनाए रखता है। यह तीन पारियों में विभाजित रहता है। इसका मध्य का भाग वर्मिस कहलाता है तथा इसके दोनों तरफ दो पार्शव पालियाँ स्थित होती हैं। पाॅन्स अनुमस्तिष्क के ठीक सामने स्थित होता है। यह अनुमस्तिष्क एवं मेड्यूला आब्लाॅन्गेटा को जोड़ता है।

b. मेड्यूला ऑब्लागेंटा -

यह मस्तिष्क का सबसे पीछे का भाग है, यह पीछे की ओर बढ़कर सुषुम्नाा रज्जु को बनाता है। इसमें गुहिका पाई जाती है।

c. पाॅन्स वेरोलाई -

यह तंत्रिका जंतुओं की बनी एक पट्टिका के समान संरचना है, जो कि अनुमस्तिष्क के एक भाग से दूसरे भाग में प्रेरणाओं को ले जाती है।

मध्य मस्तिष्क, डायनसैफलाॅन, पाॅन्स वेरोलाई एवं मेड्यूला मिलकर एक अक्षनुमा भाग को बनाते हैं, जिसको मस्तिष्क व्रन्त कहते हैं।


मस्तिष्क की गुहिकाएँ :

मनुष्य का मस्तिष्क एक खोखली संरचना होती है, इसके अंदर एक गुहिका होती है। प्रमस्तिष्क गोलार्धों में दो गुहिका होती हैं जिनको प्रथम एवं द्वितीय गुहिका या पार्शव निलय कहते हैं।

डायनसेफेलाॅन की गुहिका को तृतीय निलय और मेड्यूला ऑब्लाॅगेंटा की गुहिका को चतुर्थ गुहिका कहते हैं। इन गुहिकाओं में प्रमस्तिष्क-  सुषुम्ना द्रव भरा होता है।

मस्तिष्क के कार्य (Mastishk Ke Karya in Hindi)

मनुष्य के मस्तिष्क के विभिन्न भाग अलग-अलग कार्य करते हैं।

  1. घ्राण पिण्ड गन्ध को दर्शाता है।
  2. प्रमस्तिष्क चेतना, बुद्धि, स्मृति, विचार एवं इच्छा शक्ति का केंद्र है।
  3. यह बोध का केंद्र है और मनुष्य के हंसने या रोने पर नियंत्रण रखता है।
  4. इसमें विभिन्न प्रकार की संवेदनाओं - दृष्टि, श्रवण के केंद्र होते हैं।
  5. यह तंत्रिका तंत्र के शेष भागों पर नियंत्रण रखता है।
  6. यह ठंड, गर्मी, स्पर्श, प्रकाश आदि के प्रति व्यवहार को प्रेरित करता है।
  7. प्रमस्तिष्क प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शरीर की सारी क्रियाओं को नियंत्रित करता है।
  8. भूख प्यास, ताप, नींद, थकावट, घृणा, संभोग एवं तंत्रिका तंत्र के अनैच्छिक कार्यों का नियंत्रण।
  9. मध्य मस्तिष्क दृष्टि, सुनने एवं प्रतिवर्ती क्रियाओं का नियंत्रण करता है।
  10. ऐच्छिक गतियों का नियंत्रण।
  11. निगलने, वमन करने आदि क्रियाओं का नियमन।
  12. हृदय स्पंदन, स्वास तर, एवं आहारनाल की क्रमाकुंचन गति पर नियंत्रण।

सुषुम्ना/मेरूरज्जू (Spinal Cord):

यह कशेरुक दंड की गुहिका में प्रथम कशेरूक से कटे प्रारंभ होकर कशेरुका तक स्थित रहता है। मस्तिष्क के समान सुषुम्ना भी संयोजी ऊतक से बनी तीन झिल्लियों से घिरी रहती है।

सुषुम्ना में श्वेत पदार्थ बाहर की ओर और धूसर पदार्थ अंदर की ओर होता है। इन झिल्लियो के तीनों स्तरों के बीच प्रमस्तिष्क सुषुम्ना द्रव भरा रहता है। यह सुषुम्ना की बाहरी आघातों से रक्षा करता है।

सुषुम्ना की आंतरिक संरचना (Susumna Ki Aantrik Sanrachna):

सुषुम्ना मेरुरज्जु के मध्य में केंद्रीय नाल स्थित होती है। इस नाल के चारों ओर धूसर पदार्थ पाया जाता है। सुषुम्ना की अनुप्रस्थ काट में धूसर पदार्थ 'H' की आकृति का दिखाई देता है।

धूसर पदार्थ के द्वारा पृष्ठीय सतह पर अधर श्रंगु बनाया जाता है। इसी प्रकार धूसर पदार्थ वक्षीय एवं लम्बर क्षेत्र में पार्श्व श्रंगु को बनाता है।

धूसर पदार्थ के चारों ओर सफेद पदार्थ नहीं पाया जाता है। सुषुम्ना की पृष्ठीय सतह पर पृष्ठीय विदर एवं पृतिपृष्ठीय सतह पर अधरीय खाँच पाई जाती है।

सुषुम्ना की केंद्रीय नाल में मस्तिष्क की गुहिका के समान प्रमस्तिष्कीय-सुषुम्ना द्रव पाया जाता है। सुषुम्ना के पृष्ठीय श्रंगों से महीन संवेदी तन्तु एवं प्रतिपृष्ठीय श्रंगों से महीन से महीन प्रेरक तंतु निकलते हैं। इन तन्तुओं को पृष्ठीय एवं प्रतिपृष्ठीय मूल कहते हैं।


सुषुम्ना/मेरुरज्जु से 31 जोड़ी सुषुम्ना तंत्रिकाएँ निकलती हैं। प्रत्येक सुषुम्ना तंत्रिका सुषुम्ना से दो मूलों से जुड़ी रहती है। संवेदी तंत्रिका पृष्ठीय मूल के द्वारा प्रवेश करती है, जबकि प्रेरक तंत्रिका प्रतिपृष्ठीय मूल से बाहर निकलती है।

सुषुम्ना के कार्य (Works Of  Spinal Cord):

  • मस्तिष्क से आने वाली प्रेरणाओं या उद्दीपनों का संवहन करती हैं।
  • सुषुम्ना प्रतिवर्ती क्रियाओं का समन्वय एवं नियंत्रण करती है।

परिधीय तंत्रिका तंत्र-

इसके अंतर्गत विभिन्न तंत्रिकाएँ जो कि मस्तिष्क एवं सुषुम्ना से निकलती है। मस्तिष्क से निकलने वाली तंत्रिकाओं को कपालीय तंत्रिकाएँ एवं सुषुम्ना से निकलने वाली तंत्रिकाओं को सुषुम्ना तंत्रिकाएँ कहते हैं।

जानने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बिंदु:

  • मस्तिष्क एवं सुषुम्ना की बाहरी सतह पर तीन स्तरों की झिल्ली का आवरण पाया जाता है। इसको मस्तिष्कावरण कहते हैं।
  • मस्तिष्क का कुल भार मनुष्य में 1400 ग्राम होता है।
  • प्रमस्तिष्क गोलार्धों एवं अनुमस्तिष्क पर जितनी अधिक वलन एवं खांचे पाए जाते हैं मनुष्य उतना अधिक बुद्धिमान होता है।
  • मनुष्य के प्रमस्तिष्क गोलार्ध अधिक विकसित होते हैं। प्रमस्तिष्क गोलार्धों पर ताप, ठंड, दर्द, स्पर्श, दाब, दृष्टि, स्वाद एवं गंध तथा बोलने की क्रिया को नियंत्रित करने वाले केंद्र होते हैं।
  • मनुष्य में 12 जोड़ी कपालीय तंत्रिकाएँ एवं 31 जोड़ी सुषुम्ना तंत्रिकाएँ पाई जाती हैं।
  • हृदय स्पंदन क्रिया का नियंत्रण मेड्यूला ऑब्लाॅगेटा के द्वारा होता है।
  • पुरुष एवं स्त्री में मस्तिष्क का भार 50 एवं 45 औन्स (Ounce) होता है।
  • पौधों में तंत्रिका तंत्र नहीं होता है।

निष्कर्ष :

तो दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हमने जाना है कि मस्तिष्क क्या होता है?, तंत्रिका तंत्र क्या होता है?, मनुष्य का तंत्रिका तंत्र क्या होता है?, तथा इसके कार्य तथा कितने प्रकार की होती हैं? आदि सब कुछ इसके बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी प्राप्त की है। तो दोस्तों उम्मीद करते हैं आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा। अगर पसंद आया है तो इसे सोशल मीडिया पर अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें।

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