नमस्कार दोस्तों आज के इस आर्टिकल में जानेंगे मनुष्य के तंत्रिका तंत्र के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी। जैसे कि तंत्रिका तंत्र क्या है? तथा तंत्रिका तंत्र के कार्य, मनुष्य की तंत्रिका तंत्र के कितने भाग होते हैं? एवं मस्तिष्क के कार्य आदि। तो आइए शुरू करते हैं -
तंत्रिका तंत्र क्या है? (Tantrika Tantra kya Hai in Hindi)
तंत्रिका तंत्र के कार्य (Tantrika Tantra Ke Karya)
- शरीर की सभी क्रियाओं का नियमन एवं नियंत्रण करता है।
- इसके संवेदी अंगों के द्वारा बाहरी वातावरण में होने वाली क्रियाओं को प्राप्त करता है।
- प्रतिवर्ती क्रिया द्वारा शरीर की रक्षा करता है।
- शरीर के सभी ऊतकों एवं अंगों में समन्वय स्थापित करता है।
- आंतरिक वातावरण का नियंत्रण करता है।
मनुष्य का तंत्रिका तंत्र |Manushya Ka Tantrika Tantra) :
मनुष्य एवं अन्य कशेरुक प्राणियों के तंत्रिका तंत्र को तीन भागों में विभाजित किया जाता है।
- केंद्रीय तंत्रिका तंत्र
- परिधीय तंत्रिका तंत्र
- स्वायतः तंत्रिका तंत्र
1. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र :
मस्तिष्क (Brain) -
यह तंत्रिका तंत्र का प्रमुख केंद्र बिंदु होता है, जिसके द्वारा मनुष्य के शरीर की विभिन्न जैविक क्रियाओं का नियंत्रण होता है।
मस्तिष्क की संरचना (Mastishk Ki Sanrachna in Hindi)
- अग्र मस्तिष्क (Fore Brain)
- मध्य मस्तिष्क (Mid Brain)
- पश्च स्थिति (Hind Brain)
(1.) अग्र मस्तिष्क -
a. प्रमस्तिष्क (Cerebrum)
प्रमस्तिष्क दो गोलार्धों का बना होता है। दोनों प्रमस्तिषक गोलार्धों को आपस में जोड़ने वाली अनुप्रस्थ पट्टिका को कार्पस कैलोसम (Corpus Callosum) कहते हैं।
प्रमस्तिष्क गोलार्ध चार पिण्डों में विभाजित होता है। प्रमस्तिष्क गोलार्धों की बाहरी स्तर को कॉर्टेक्स कहते हैं। यह धूसर पदार्थ (Grey Matter) से बना होता है। इसका आंतरिक भाग सफेद पदार्थ का बना होता है।
"जिस प्राणी एवं मनुष्य में प्रमस्तिष्क जितना बड़ा तथा जितनी अधिक गायरी एवं सल्साई पाई जाती हैं वह उतना ही अधिक बुद्धिमान होता है।" प्रमस्तिष्क गोलार्ध के अग्र सिरे पर दो पिण्ड घ्राण पिण्ड होते हैं।
पढ़ें - नियंत्रण एवं समन्वय क्या है?
b. हायपोथैलेमस -
प्रमस्तिष्क गोलार्धों के नीचे एक छोटा भाग डायनसेफैलान स्थित होता है जो कि एक कीप समान संरचना के द्वारा ढंका रहता है। इससे एक अंतः स्रावी ग्रंथि पीयूष ग्रंथि जुड़ी रहती है।
(2.) मध्य मस्तिष्क -
(3.) पश्च मस्तिष्क -
a. अनुमस्तिष्क -
b. मेड्यूला ऑब्लागेंटा -
c. पाॅन्स वेरोलाई -
मध्य मस्तिष्क, डायनसैफलाॅन, पाॅन्स वेरोलाई एवं मेड्यूला मिलकर एक अक्षनुमा भाग को बनाते हैं, जिसको मस्तिष्क व्रन्त कहते हैं।
मस्तिष्क की गुहिकाएँ :
डायनसेफेलाॅन की गुहिका को तृतीय निलय और मेड्यूला ऑब्लाॅगेंटा की गुहिका को चतुर्थ गुहिका कहते हैं। इन गुहिकाओं में प्रमस्तिष्क- सुषुम्ना द्रव भरा होता है।
मस्तिष्क के कार्य (Mastishk Ke Karya in Hindi)
- घ्राण पिण्ड गन्ध को दर्शाता है।
- प्रमस्तिष्क चेतना, बुद्धि, स्मृति, विचार एवं इच्छा शक्ति का केंद्र है।
- यह बोध का केंद्र है और मनुष्य के हंसने या रोने पर नियंत्रण रखता है।
- इसमें विभिन्न प्रकार की संवेदनाओं - दृष्टि, श्रवण के केंद्र होते हैं।
- यह तंत्रिका तंत्र के शेष भागों पर नियंत्रण रखता है।
- यह ठंड, गर्मी, स्पर्श, प्रकाश आदि के प्रति व्यवहार को प्रेरित करता है।
- प्रमस्तिष्क प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शरीर की सारी क्रियाओं को नियंत्रित करता है।
- भूख प्यास, ताप, नींद, थकावट, घृणा, संभोग एवं तंत्रिका तंत्र के अनैच्छिक कार्यों का नियंत्रण।
- मध्य मस्तिष्क दृष्टि, सुनने एवं प्रतिवर्ती क्रियाओं का नियंत्रण करता है।
- ऐच्छिक गतियों का नियंत्रण।
- निगलने, वमन करने आदि क्रियाओं का नियमन।
- हृदय स्पंदन, स्वास तर, एवं आहारनाल की क्रमाकुंचन गति पर नियंत्रण।
सुषुम्ना/मेरूरज्जू (Spinal Cord):
सुषुम्ना में श्वेत पदार्थ बाहर की ओर और धूसर पदार्थ अंदर की ओर होता है। इन झिल्लियो के तीनों स्तरों के बीच प्रमस्तिष्क सुषुम्ना द्रव भरा रहता है। यह सुषुम्ना की बाहरी आघातों से रक्षा करता है।
सुषुम्ना की आंतरिक संरचना (Susumna Ki Aantrik Sanrachna):
धूसर पदार्थ के द्वारा पृष्ठीय सतह पर अधर श्रंगु बनाया जाता है। इसी प्रकार धूसर पदार्थ वक्षीय एवं लम्बर क्षेत्र में पार्श्व श्रंगु को बनाता है।
धूसर पदार्थ के चारों ओर सफेद पदार्थ नहीं पाया जाता है। सुषुम्ना की पृष्ठीय सतह पर पृष्ठीय विदर एवं पृतिपृष्ठीय सतह पर अधरीय खाँच पाई जाती है।
सुषुम्ना की केंद्रीय नाल में मस्तिष्क की गुहिका के समान प्रमस्तिष्कीय-सुषुम्ना द्रव पाया जाता है। सुषुम्ना के पृष्ठीय श्रंगों से महीन संवेदी तन्तु एवं प्रतिपृष्ठीय श्रंगों से महीन से महीन प्रेरक तंतु निकलते हैं। इन तन्तुओं को पृष्ठीय एवं प्रतिपृष्ठीय मूल कहते हैं।
सुषुम्ना के कार्य (Works Of Spinal Cord):
- मस्तिष्क से आने वाली प्रेरणाओं या उद्दीपनों का संवहन करती हैं।
- सुषुम्ना प्रतिवर्ती क्रियाओं का समन्वय एवं नियंत्रण करती है।
परिधीय तंत्रिका तंत्र-
जानने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बिंदु:
- मस्तिष्क एवं सुषुम्ना की बाहरी सतह पर तीन स्तरों की झिल्ली का आवरण पाया जाता है। इसको मस्तिष्कावरण कहते हैं।
- मस्तिष्क का कुल भार मनुष्य में 1400 ग्राम होता है।
- प्रमस्तिष्क गोलार्धों एवं अनुमस्तिष्क पर जितनी अधिक वलन एवं खांचे पाए जाते हैं मनुष्य उतना अधिक बुद्धिमान होता है।
- मनुष्य के प्रमस्तिष्क गोलार्ध अधिक विकसित होते हैं। प्रमस्तिष्क गोलार्धों पर ताप, ठंड, दर्द, स्पर्श, दाब, दृष्टि, स्वाद एवं गंध तथा बोलने की क्रिया को नियंत्रित करने वाले केंद्र होते हैं।
- मनुष्य में 12 जोड़ी कपालीय तंत्रिकाएँ एवं 31 जोड़ी सुषुम्ना तंत्रिकाएँ पाई जाती हैं।
- हृदय स्पंदन क्रिया का नियंत्रण मेड्यूला ऑब्लाॅगेटा के द्वारा होता है।
- पुरुष एवं स्त्री में मस्तिष्क का भार 50 एवं 45 औन्स (Ounce) होता है।
- पौधों में तंत्रिका तंत्र नहीं होता है।



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