अभिवृत्ति का अर्थ एवं परिभाषाएँ // Abhivriti Ka Arth Evam Paribhashayen (Definitions of Attitude in Hindi)
अर्थ:-
सामान्य रूप से अभिवृत्ति एक मानसिक तथ्य है जिसको विभिन्न सामाजिक परिस्थितियों के संदर्भ में प्रस्तुत किया जाता है। एक व्यक्ति की किसी वस्तु तथा विचार के प्रति क्या व्यवहार करता है, उसका अध्ययन अभिवृत्ति के माध्यम से होता है। मनोवैज्ञानिकों ने मानव के व्यवहार का प्रमुख कारक अभिवृत्ति को ही माना है। अभिवृत्ति किसी संस्था तथा परिस्थिति के प्रति मानव के व्यवहार को प्रदर्शित करती है। दूसरे शब्दों में मानवीय व्यवहार का निर्धारण अभिवृत्ति के माध्यम से होता है।
अभिवृत्ति की परिभाषाएं / Abhivritti ki Paribhasha (Definition of Attitude) :-
अभिवृत्ति सामान्य रूप से वह विशेष दृष्टिकोण होता है जो किसी व्यक्ति के व्यवहार तथा विचार को प्रदर्शित करता है जो कि वह संसार की वस्तुओं के संदर्भ में ज्ञान रखता है। इस दृष्टिकोण को विद्वानों ने अपने अपने शब्दों में परिभाषित किया है। प्रमुख विद्वानों की परिभाषाएं निम्न हैं -
फ्रीमेन के अनुसार, " अभिवृत्ति निश्चित परिस्थितियों, व्यक्तियों तथा वस्तुओं के प्रति संगत रूप से प्रत्युत्तर देने वाली स्वाभविक तत्परता है, जिसे सीखा जाता है एवं यह किसी व्यक्ति विशेष के प्रत्युत्तर देने की लाक्षणिक विधि बन जाती है।"
रेमर्स, समेल तथा गेज के अनुसार, " अभिवृत्ति अनुभवों के द्वारा व्यवस्थित वह संवेगात्मक प्रवृत्ति है जो किसी मनोवैज्ञानिक पदार्थ अथवा वस्तु के प्रति सकारात्मक या नकारात्मक रूप से प्रतिक्रिया करती है।"
थर्स्टन के अनुसार, " कुछ मनोवैज्ञानिक पदार्थों से संबंधित सकारात्मक तथा नकारात्मक प्रभावों की मात्रा को अभिवृत्ति की संज्ञा दी जाती है।"
प्रो. एस. के. दुबे के अनुसार, " अभिवृत्ति बाह्य व्यवहार का वह महत्वपूर्ण कारक है, जो व्यक्ति की किसी मनोवैज्ञानिक पदार्थ के प्रति अनुकूल तथा प्रतिकूल भावना को प्रदर्शित करता है।"
उपरोक्त परिभाषाओं से यह स्पष्ट हो जाता है कि "व्यक्ति किसी चिन्ह, वाक्य खंड, संस्था, आदर्श, विचार तथा राष्ट्र के प्रति व्यक्ति के सकारात्मक और नकारात्मक व्यवहार को प्रदर्शित करता है।" जब हम किसी वस्तु के प्रति सकारात्मक अभिवृत्ति रखते हैं तो उसके प्रति अनुकूल व्यवहार करते हैं एवं जब किसी वस्तु के प्रति नकारात्मक अभिवृत्ति रखते हैं तो उसके प्रति प्रतिकूल व्यवहार करते हैं।
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अभिवृत्ति की विशेषताएं / abhivritti ki visheshtayen :-
अभिवृत्ति के बारे में विद्वानों के विचार तथा परिभाषाओं के विश्लेषण के आधार पर इसमें निम्नलिखित प्रमुख विशेषताएं पाई जाती हैं -
- यह सदैव परिवर्तनशील होती है। समय तथा परिस्थिति के अनुसार इसमें परिवर्तन पाया जाता है।
- अभिवृत्ति का संबंध भाव तथा संवेगों से होता है। भावना तथा संवेगों का प्रभाव अभिवृत्ति पर व्यापक रूप से होता है।
- अभिवृत्ति अनुभव के आधार पर भी अर्जित की जाती है। व्यक्तियों के संबंध तथा मूल्यों के आधार पर इसका निर्धारण होता है।
- अभिवृत्ति के माध्यम से हमारा व्यवहार प्रभावित होता है क्योंकि एक व्यक्ति की अभिवृत्ति किसी दूसरे व्यक्ति की अभिवृत्ति को प्रभावित करती है।
- अभिवृत्ति में स्वाभाविक रूप से तत्परता पाई जाती है, जिसे व्यक्ति किसी वस्तु के प्रति प्रदर्शित करता है।
- यह एकरूपता पर आधारित होती है अर्थात व्यक्ति किसी एक वस्तु के प्रति सकारात्मक अथवा नकारात्मक एक ही तरह की अभिवृत्ति रखता है।
- यह व्यक्ति के व्यवहार की दिशा को निर्धारित करती है क्योंकि व्यक्ति का व्यवहार अभिवृत्ति के आधार पर ही निर्धारित होता है।
- अभिवृत्ति सामान्य तथा विशिष्ट रूपों में पाई जाती है। किसी वर्ग के प्रति व्यवहार सामान्य अभिवृत्ति में आता है एवं किसी व्यक्ति के विशेष के प्रति व्यवहार विशिष्ट अभिवृत्ति में आता है।
अभिवृत्ति के प्रकार / Abhivritti ke Prakar (Types of Attitude) :-
अभिवृत्ति के वर्गीकरण को विद्वान अपने विचारों के आधार पर अलग-अलग वर्गीकृत करते हैं। अभिवृत्ति को मुख्य रूप से निम्न भागों में विभक्त किया जा सकता है -
1. सामान्य अभिवृत्ति ➡
जब हम किसी वर्ग विशेष के प्रति अपने व्यवहार का प्रदर्शन करते हैं तो वह सामान्य अभिवृद्धि कहलाती है। जैसे भारतीय जनता पार्टी के प्रति किया गया व्यवहार एक सामान्य व्यवहार की श्रेणी में आएगा एवं इस तरह की अभिवृत्ति सामान्य अभिवृत्ति कहलाएगी।
2. विशिष्ट अभिवृत्ति ➡
जब हमारी रूचि किसी व्यक्ति विशेष में होती है तथा उसके प्रति हमारा व्यवहार श्रद्धा और सम्मान से परिपूर्ण होता है तो इस प्रकार की अभिवृत्ति वशिष्ठ अभिवृत्ति कहलाती है। जैसे भारतीय जनता पार्टी में श्री अटल बिहारी बाजपेई जी के प्रति हमारी रुचि तथा सम्मान विशिष्ट अभिवृत्ति का उदाहरण होगा।
3. सकारात्मक अभिवृत्ति ➡
जब हम किसी वस्तु, संस्था तथा विचार के प्रति आकर्षित होते हैं तो उससे हमारा लगाओ भावात्मक रूप से होता है। हम उसके प्रति सकारात्मक व्यवहार रखते हैं तथा अपने आप को उसके अनुसार समायोजित करने का प्रयास करते हैं, तो इस तरह की अभिवृत्ति सकारात्मक अथवा धनात्मक अभिवृत्ति कहलाती है।
4. नकारात्मक अभिवृत्ति ➡
जब किसी संस्था, जाति तथा व्यक्ति के प्रति हमारा मन अविश्वास और घृणा से भर जाता है। उसके द्वारा हमारी भावना एवं विश्वास को ठेस पहुंचाई जाती है तो हम अपने आपको उससे दूर रखने का प्रयत्न करते हैं। इस तरह की अभिवृत्ति नकारात्मक अथवा ऋणात्मक अभिवृत्ति कहलाती है।
अभिवृत्ति के परिमाण (Magnitude of Attitude in Hindi) :-
अभिवृत्ति के परिमाण को निम्न बिंदुओं के माध्यम से स्पष्ट किया जा सकता है -
1. तीव्रता ➡
अभिवृत्ति की तीव्रता पर भाव तथा संवेगों का प्रभाव पड़ता है। किसी वस्तु के प्रति हमारे संवेग जितने ज्यादा तीव्र होंगे उसके प्रति हमारी अभिवृत्ति उतनी ही ज्यादा तीव्र होगी। इसके विपरीत अवस्था में अभिवृत्ति की तीव्रता कम होगी।
2. व्यक्तिगत तथा सामान्य प्रदर्शन ➡
अभिवृत्ति को सम्मान एवं व्यक्तिगत रूप से प्रदर्शित किया जा सकता है। जैसे एक बालक अपनी मां के प्रति जो रुचि रखता है, वह व्यक्तिगत अभिवृत्ति का प्रदर्शन होता है एवं अन्य व्यक्तियों की मां के प्रति जो रूचि होगी, वह समान्य अभिवृत्ति का प्रदर्शन होगा।
3. दिशा ➡
अभिवृत्ति प्रमुख रूप से सकारात्मक तथा नकारात्मक रूप में प्रस्तुत की जाती है अर्थात पक्ष और विपक्ष में प्रकट की जाती है। किसी वस्तु के प्रति हमारी अभिवृत्ति या तो पक्ष में होगी या विपक्ष में।
4. स्थिरता ➡
यह अभिवृत्ति की उस दिशा की तरफ संकेत करता है जिसमें व्यक्ति अपनी अभिवृत्ति को किसी वस्तु के प्रति स्थिर रूप में रखता है क्योंकि अभिवृत्ति में स्थिरता की स्थिति भावना तथा संवेगों की स्थिरता के ऊपर आधारित होती है। अगर किसी वस्तु के प्रति हमारा लगाव ज्यादा है तो उसके प्रति अभिवृत्ति में स्थिरता पाई जाएगी।
निष्कर्ष:
दोस्तों आज के इस लेख में हमने जाना कि अभिवृत्ति का अर्थ एवं परिभाषा क्या है? एवं अभिवृत्ति की विशेषताएं कौन-कौन सी हैं? तथा अभिवृत्ति के प्रकार कितने प्रकार हैं? इन सभी के बारे में डिटेल में जानकारी दी है। तो उम्मीद करते हैं आपको यह लेख पसंद आया होगा। यदि पसंद आया है तो इसे अपने दोस्तों के साथ भी जरूर शेयर करें ताकि उनको भी अभिवृत्ति के बारे में जानकारी प्राप्त हो सके। धन्यवाद।


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